चैत्र नवरात्रि हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा के लिए समर्पित होता है। यह पर्व हिंदू नववर्ष की शुरुआत के समय आता है और पूरे भारत में बड़ी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है।
📅 चैत्र नवरात्रि 2026 की तिथियाँ
2026 में Chaitra Navratri की शुरुआत 19 मार्च 2026 (गुरुवार) से होगी और समापन 27 मार्च 2026 (शुक्रवार) को होगा।
| दिन | तिथि | देवी का रूप |
|---|---|---|
| पहला दिन | 19 मार्च | माँ शैलपुत्री |
| दूसरा दिन | 20 मार्च | माँ ब्रह्मचारिणी |
| तीसरा दिन | 21 मार्च | माँ चंद्रघंटा |
| चौथा दिन | 22 मार्च | माँ कूष्मांडा |
| पाँचवाँ दिन | 23 मार्च | माँ स्कंदमाता |
| छठा दिन | 24 मार्च | माँ कात्यायनी |
| सातवाँ दिन | 25 मार्च | माँ कालरात्रि |
| आठवाँ दिन | 26 मार्च | माँ महागौरी |
| नौवाँ दिन | 27 मार्च | माँ सिद्धिदात्री |
नवरात्रि के बाद राम नवमी का पर्व मनाया जाता है, जो भगवान श्रीराम के जन्म का उत्सव है।
🌺 चैत्र नवरात्रि का महत्व
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यह पर्व माँ दुर्गा की शक्ति और भक्ति का प्रतीक है।
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इन नौ दिनों में भक्त उपवास रखकर माँ के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं।
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मान्यता है कि इस दौरान सच्चे मन से पूजा करने पर माँ दुर्गा सभी कष्ट दूर करती हैं और सुख-समृद्धि प्रदान करती हैं।
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कई जगहों पर यह पर्व हिंदू नववर्ष की शुरुआत के रूप में भी मनाया जाता है।
🪔 पूजा विधि
चैत्र नवरात्रि में पूजा करने की सामान्य विधि इस प्रकार है:
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घट स्थापना (कलश स्थापना) – पहले दिन शुभ मुहूर्त में कलश स्थापित किया जाता है।
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माँ दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
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दीपक जलाकर दुर्गा चालीसा और मंत्रों का पाठ करें।
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रोजाना अलग-अलग देवी रूप की पूजा करें।
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फल, फूल, नारियल, और प्रसाद अर्पित करें।
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नौवें दिन कन्या पूजन (कन्या भोज) किया जाता है।
🙏 प्रमुख परंपराएँ
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व्रत रखना – कई लोग पूरे नौ दिन उपवास रखते हैं।
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जौ बोना (जवारे) – कलश के पास मिट्टी में जौ बोने की परंपरा है।
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कन्या पूजन – अष्टमी या नवमी को 9 कन्याओं को देवी का रूप मानकर पूजा की जाती है।
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भजन-कीर्तन – कई स्थानों पर दुर्गा जागरण और भक्ति कार्यक्रम आयोजित होते हैं।
